| Song: Dil Aakhir Tu Kyun Rota Hai |
| Movie: Zindagi Na Milegi Dobara |
| Genre: Indian Film pop |
| Year: 2011 |
| By: Farhan Akhtar |
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| English Lyrics |
Jab jab dard ka baadal chhaya
Jab gham ka saya lehraaya
Jab aansoo palkon tak aaya
Jab yeh tanha dil ghabraaya
Hum ne dil ko yeh samjhaya
Dil aakhir tu kyun rota hai?
Duniya mein yun hi hota hai
Yeh jo gehre sannate hain
Waqt ne sabko hi baante hain
Thoda gham hai sabka qissa
Thodi dhoop hai sabka hissa
Aankh teri bekaar hi nam hai
Har pal ek naya mausam hai
Kyun tu aise pal khota hai
Dil aakhir tu kyun rota hai
Jab gham ka saya lehraaya
Jab aansoo palkon tak aaya
Jab yeh tanha dil ghabraaya
Hum ne dil ko yeh samjhaya
Dil aakhir tu kyun rota hai?
Duniya mein yun hi hota hai
Yeh jo gehre sannate hain
Waqt ne sabko hi baante hain
Thoda gham hai sabka qissa
Thodi dhoop hai sabka hissa
Aankh teri bekaar hi nam hai
Har pal ek naya mausam hai
Kyun tu aise pal khota hai
Dil aakhir tu kyun rota hai
| Hindi Lyrics |
कुछ अपने ही तो छूटे हैं, कुछ सपने ही तो टूटे हैं,
अपने, सपने को पाने में, हम खुदा से भी तो रूठे हैं,
मतलब की इस दुनिया में तू ऐसे सपने क्यूं संजोता है ?
दिल आखिर तू क्यूँ रोता है ?
जब धड़कन ही रुक जाना है, फिर क्या खोना क्या पाना है ?
साँसों में बसा हो भले कोई, सब छोड़ यहीं पर जाना है,
कोशिश कर ले चाहे जितनी, जो लिखा वही ही होता है...
दिल आखिर तू क्यूं रोता है ?
कुछ यादें ही तो छूटी हैं, कुछ रश्में ही तो टूटी हैं,
कुछ वादों से ही मुकरे हैं, कुछ कसमें ही तो झूठी हैं,
ये कसमें, वादे, प्यार और रश्में, सब सपनों में होता है...
दिल आखिर तू क्यूँ रोता है ?
अश्क़ों संग सावन भी बरसा है, 'बजरंग' का भी अंतर्मन तरसा है,
'काजल' आँखों से बह ही रही, फिर क्यों गालों पर हर्षा है,
तुम एक अकेले जल न रहे, 'उसका' दिल भी न सोता है..
दिल आखिर तू क्यूँ रोता है
अपने, सपने को पाने में, हम खुदा से भी तो रूठे हैं,
मतलब की इस दुनिया में तू ऐसे सपने क्यूं संजोता है ?
दिल आखिर तू क्यूँ रोता है ?
जब धड़कन ही रुक जाना है, फिर क्या खोना क्या पाना है ?
साँसों में बसा हो भले कोई, सब छोड़ यहीं पर जाना है,
कोशिश कर ले चाहे जितनी, जो लिखा वही ही होता है...
दिल आखिर तू क्यूं रोता है ?
कुछ यादें ही तो छूटी हैं, कुछ रश्में ही तो टूटी हैं,
कुछ वादों से ही मुकरे हैं, कुछ कसमें ही तो झूठी हैं,
ये कसमें, वादे, प्यार और रश्में, सब सपनों में होता है...
दिल आखिर तू क्यूँ रोता है ?
अश्क़ों संग सावन भी बरसा है, 'बजरंग' का भी अंतर्मन तरसा है,
'काजल' आँखों से बह ही रही, फिर क्यों गालों पर हर्षा है,
तुम एक अकेले जल न रहे, 'उसका' दिल भी न सोता है..
दिल आखिर तू क्यूँ रोता है
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